"दिल को रफू कर ले" - ईशान (करण वी ग्रोवर) और निक्की (आयेशा खान) की एक जटिल प्रेम कहानी। कैसे दो अधूरे लोग जीवन में मिलते हैं और उनके व्यक्तिगत विश्वासों, दृष्टिकोणों, इच्छाओं और स्वभावों के कारण उनका रिश्ता बिखर जाता है। लेकिन विवाह की पवित्रता उन्हें अपने रिश्ते के बारे में फिर से सोचने पर मजबूर करती है। वे अपने टूटे हुए रिश्ते को फिर से जोड़ने का निर्णय लेते हैं और खुद को एक और मौका देने का वादा करते हैं: "चल, दिल रफू करते हैं... प्यार के धागे से......
"दिल को रफू कर ले" - ईशान (करण वी ग्रोवर) और निक्की (आयेशा खान) की एक जटिल प्रेम कहानी। कैसे दो अधूरे लोग जीवन में मिलते हैं और उनके व्यक्तिगत विश्वासों, दृष्टिकोणों, इच्छाओं और स्वभावों के कारण उनका रिश्ता बिखर जाता है। लेकिन विवाह की पवित्रता उन्हें अपने रिश्ते के बारे में फिर से सोचने पर मजबूर करती है। वे अपने टूटे हुए रिश्ते को फिर से जोड़ने का निर्णय लेते हैं और खुद को एक और मौका देने का वादा करते हैं:
"चल, दिल रफू करते हैं... प्यार के धागे से... फिर से शुरू करते हैं... नींद से जागे से..."
पर क्या वह रिश्ता रफू हो पाएगा? क्या निक्की को वह प्यार मिलेगा जिसकी उसे तलाश थी? क्या ईशान निक्की को समझ पाएगा? क्या निक्की और ईशान खुशी-खुशी साथ रह पाएंगे? क्या "खुशहाल अंत" जैसी कोई चीज़ होती है?"